मुहब्बत में मय से माँ तक : मैं ही मैं हूँ (Hindi Poetry)

This is a collection of Poetry in Hindi and Urdu. यह एक आम सी भाषा में कहे गए नए पुराने ख्यालात की पिटारी है – शेरोशायरी और कविताओं का संग्रह है. जो एक नारी के जज़्बात हैं. The topics range from love and romance and desire and at the same time it has expressions of devotion and prayers. हर तरह के जज़्बात का इनमे ज़िक्र है -प्यार मुहब्बत पूजा माता पिता के रिश्ते…

 श्वेता सिंह की कुछ ताजा नज़में यहाँ पढ़ें

जो चलते रहते हैं अंगारों पर

नजर उनकी शायद तारों पर होगी

न टूट जाना यूंहीं श्वेतकी तोहमत बिलावजह

यारों पै होगी

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मैं गलतियां क्या गिनता अपनी

गिनाने वाले बहुत थे

जाम उठाना ज़रूरी था, पिलाने वाले बहुत थे

जलने वाला भी चाहिये, आग लगाने वाले बहुत थे

क्यों न ले हर गम को झोली में, भीख देने वाले बहुत थे

वहशत भी तो हो किसी को, मुहब्बत तो करने वाले बहुत थे

तू कम ही समझ ले खुद को श्वेत खुद को ज्यादा समझने वाले बहुत थे

सर कई दफ़ा झुका आए,
दिल जहाँ एक बार बेबस हुआ
उन्होंने खिड़की भी न खोली, हमाए घर से गायब दरोदिवार हुआ
लगभग बराबर ही समझिये हिसाब,
हम गंगा नहा आए, उनको सवाब हुआ

तेरे काजल की बदरी ने
बरसाया सावन
मेरी कश्तियाँ ड़ूूूबी तेरे आँखो के समंदर में
नजरें तिरछी न कर
और न फंसा हमें भंवर में
पलकें उठा
हम गहरे में डूबेंगे, किनारे पर नहीं
झुका लेना फिर से इन्हें
कश्तियाँ अभी तो और आएंगी

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